चांदी ₹20000 सस्ती, सोना 4000 रुपये टूटा, जानें अचानक गिरावट । Gold-Silver Price Crash

By Shreya

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Gold-Silver Price Crash – बाजार में निवेशकों के लिए गुरुवार का दिन काफी चौंकाने वाला साबित हुआ जब मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना और चांदी की कीमतें अचानक से धड़ाम से गिर गईं। जो कीमती धातुएं बीते कुछ दिनों से लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही थीं, वे एक ही झटके में हजारों रुपये नीचे आ गईं। इस अप्रत्याशित गिरावट ने व्यापारियों और निवेशकों को सकते में डाल दिया है।

बाजार खुलते ही आया भूकंप

गुरुवार की सुबह जब एमसीएक्स पर वायदा कारोबार की शुरुआत हुई, तो पहले ही कुछ मिनटों में चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव जो बुधवार को 3,25,602 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुआ था, वह गुरुवार को सीधे गिरकर 3,05,753 रुपये पर आ गया। यह गिरावट करीब 19,849 रुपये प्रति किलोग्राम की रही, जो किसी भी मानक से देखें तो बेहद बड़ी मानी जाती है।

चांदी में आई इस भारी गिरावट ने बाजार में हड़कंप मचा दिया। जिन निवेशकों ने ऊंची कीमतों पर खरीदारी की थी, उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि ऐसी तीव्र गिरावट काफी समय बाद देखने को मिली है। बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई निवेशकों ने अपनी पोजीशन बंद करने में ही समझदारी समझी।

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सोने की चमक भी फीकी पड़ी

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी जोरदार गिरावट दर्ज की गई। 5 फरवरी की एक्सपायरी वाले सोने का वायदा भाव बुधवार को 1,52,862 रुपये प्रति 10 ग्राम पर समाप्त हुआ था। लेकिन गुरुवार को यह गिरकर 1,48,777 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। यानी 24 कैरेट सोना एक ही दिन में 4,085 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया।

बीते तीन दिनों में सोना लगातार नए जीवनकाल के उच्चतम स्तर पर पहुंच रहा था और निवेशकों में इसे लेकर काफी उत्साह था। लेकिन गुरुवार की गिरावट ने सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जिन लोगों ने हाल के दिनों में सोने में निवेश बढ़ाया था, उनके लिए यह गिरावट निराशाजनक रही। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कनेक्शन

इस अचानक आई गिरावट के पीछे का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान माने जा रहे हैं। बीते कुछ दिनों से ट्रंप लगातार अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाने की धमकियां दे रहे थे। वेनेजुएला, ईरान और फिर ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देशों को टैरिफ अटैक की चेतावनी दी जा रही थी। इन सबसे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था।

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जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है, निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित ठिकानों पर लगाना शुरू कर देते हैं। सोना और चांदी को परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। इसलिए ट्रंप की आक्रामक नीतियों और धमकियों के कारण पिछले कुछ दिनों में इन कीमती धातुओं की मांग में जोरदार इजाफा हुआ था। निवेशक भारी मात्रा में सोना-चांदी खरीदने लगे थे, जिससे इनकी कीमतें आसमान छूने लगी थीं।

तनाव कम करने वाले बयान

लेकिन अब स्थिति में बदलाव आया है। ट्रंप ने हाल ही में कुछ ऐसे बयान दिए हैं जो वैश्विक तनाव को कम करने वाले नजर आ रहे हैं। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उन्होंने नरम रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसा समझौता किया जाएगा जो अमेरिका और नाटो दोनों के लिए संतोषजनक होगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह की जबरदस्ती से यूरोपीय देशों के अमेरिका में निवेश पर बुरा असर पड़ सकता है।

यह बयान पहले की तुलना में काफी संतुलित और सोच-समझकर दिया गया लगता है। इससे यूरोपीय देशों के साथ संबंधों में सुधार की उम्मीद जगी है। जब भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो निवेशक सुरक्षित ठिकानों से पैसा निकालकर दूसरी जगहों पर लगाने लगते हैं। यही कारण है कि सोना-चांदी की कीमतों में अचानक गिरावट देखने को मिली।

भारत के साथ संबंधों पर सकारात्मक संकेत

सिर्फ ग्रीनलैंड ही नहीं, बल्कि भारत के साथ अमेरिकी संबंधों पर भी ट्रंप ने सकारात्मक बयान दिए हैं। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच में अपने संबोधन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की जमकर तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और उन्हें एक बेहतरीन व्यक्ति मानते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही एक बेहतरीन व्यापार समझौता होने जा रहा है। यह बयान भारतीय बाजारों के लिए काफी उत्साहवर्धक रहा। इससे न केवल शेयर बाजार में तेजी आई, बल्कि कीमती धातुओं पर भी असर पड़ा। जब व्यापारिक संबंधों में सुधार के संकेत मिलते हैं, तो बाजार में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ जाती है और सुरक्षित निवेश से पैसा बाहर निकलने लगता है।

बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। उनके अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है और लंबी अवधि में सोना-चांदी मजबूत निवेश विकल्प बने रहेंगे। हालांकि अल्पावधि में कुछ उतार-चढ़ाव जारी रह सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को घबराकर अपनी होल्डिंग नहीं बेचनी चाहिए, बल्कि लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना चाहिए।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का अच्छा मौका भी हो सकती है। जो लोग ऊंची कीमतों पर खरीदने से बच रहे थे, वे अब कम कीमतों पर निवेश कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए। बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सावधानीपूर्वक निवेश करना ही समझदारी है।

आगे का रुख

आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों का रुख कई कारकों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर की मजबूती, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भू-राजनीतिक घटनाक्रम – ये सभी कीमतों को प्रभावित करेंगे। अगर ट्रंप आगे भी संतुलित नीतियां अपनाते हैं और वैश्विक तनाव कम होता है, तो कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

दूसरी ओर, अगर फिर से कोई भू-राजनीतिक संकट खड़ा होता है या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना-चांदी की कीमतें दोबारा ऊपर जा सकती हैं। भारतीय बाजार में रुपये की स्थिति, आयात शुल्क में बदलाव और घरेलू मांग भी कीमतों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। शादी-विवाह का सीजन और त्योहारों के समय सोने की मांग बढ़ती है जो कीमतों को सहारा दे सकती है।

सोना-चांदी की कीमतों में गुरुवार को आई यह भारी गिरावट एक बार फिर याद दिलाती है कि कमोडिटी बाजार कितना अस्थिर हो सकता है। वैश्विक घटनाओं और नेताओं के बयानों का सीधा असर इन कीमतों पर पड़ता है। निवेशकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और किसी एक परिसंपत्ति में अपना सारा पैसा नहीं लगाना चाहिए। विविधीकरण ही जोखिम को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। चाहे कीमतें ऊपर जाएं या नीचे, एक अनुशासित निवेश रणनीति ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।

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